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कर्मचारियों की जान पर चुनावी स्टंट! भाजपा सरकार का जल्दबाज़ी वाला SIR तंत्र!

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कर्मचारियों की जान पर चुनावी स्टंट, भाजपा सरकार का जल्दबाज़ी वाला SIR तंत्र! “SIR अभियान में आखिर ऐसा क्या है कि देशभर में 27 BLO की जान चली गईऔर यूपी में आधे से कम फॉर्म ही जमा हो पाए? क्या यह सिर्फ अव्यवस्था है या किसी बड़े राजनीतिक उद्देश्य की तैयारी? माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी जिन सवालों को लगातार उठा रहे हैं, वे इस अभियान की परतें खोलते हैं, जाने  सारा सच! ” सरकार और चुनाव आयोग आज जिस SIR अभियान को सफल बताने में जुटे हैं, उसकी वास्तविकता बिल्कुल उलट है। यह केवल फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिकों के मताधिकार और लोकतंत्र की जड़ों को प्रभावित करने वाला गंभीर मुद्दा है। सरकार ने पहले इस भारी-भरकम काम के लिए सिर्फ एक महीना दिया और जब दबाव और अव्यवस्था की सच्चाई सामने आई, तब मजबूरी में केवल एक हफ्ता बढ़ाकर समयसीमा 11 दिसंबर कर दी गई। सवाल यह है कि जब आधा काम तक पूरा नहीं हुआ तो जिम्मेदारी किसकी है? क्या नागरिक दोषी हैं या फिर भाजपा की वह मानसिकता, जो बहुजन समाज और पीडीए वर्ग की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी से घबराई बैठी है? यही कारण है कि हमारे माननीय राष्ट्...

भाजपा का छलावा और प्रजापति समाज का विश्वास!

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उत्तर प्रदेश की राजनीति इस समय जिस मोड़ पर खड़ी है , वहां सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या सामाजिक न्याय केवल चुनावी नारा बनकर रह जाएगा या फिर वास्तव में वंचित समाजों को उनका हक़ मिलेगा। भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद जिस प्रकार से भ्रष्टाचार , लूट और अन्याय का वातावरण खड़ा किया है , उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह पार्टी केवल वादे करने और फिर उन्हें तोड़ देने की राजनीति करती है। सबसे पीड़ादायक उदाहरण हमारे समाज के गौरव , पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति का है। उन्हें वर्षों से जेल में कैद कर रखा गया है। अपराध सिद्ध न होने के बावजूद उन्हें केवल राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनाया गया। यह अन्याय केवल एक व्यक्ति पर नहीं हुआ , बल्कि पूरे प्रजापति समाज पर किया गया है। भाजपा का यह आचरण लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या है। इसके विपरीत समाजवादी पार्टी और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष मा० अखिलेश यादव जी ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि उनका राजनीति से जुड़ा हर कदम सामाजिक न्याय और संवेदनशीलता की दिशा में होता है।  मऊ जनपद के एक युवक नितिन प्रजापति ने सात साल से आवास के लिए भटक रही गरीब महिला ...

बाँदा के नरैनी विधानसभा के थाना कालिंज़र क्षेत्र में मानवता हुई तार-तार!

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बाँदा के नरैनी विधानसभा के थाना कालिंज़र क्षेत्र में मानवता हुई तार-तार!  कल दिनांक: 29 जुलाई 2025 को कानपुर के हैलट अस्पताल में उस छः वर्षीय मासूम बच्ची से मुलाकात की, जो बाँदा जनपद के कालिंजर थाना क्षेत्र में दरिंदगी की शिकार हुई। यह बच्ची अब सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, पूरे समाज की आत्मा पर गहरे वार की प्रतीक बन चुकी है। उस मासूम बच्ची के साथ जो दरिंदगी हुई, वह बर्बरता की सारी सीमाएं चुकी है। जब बच्ची ने चिल्लाने की कोशिश की, तो उसकी जीभ काट दी। शरीर के संवेदनशील अंगों पर जानवरों की तरह हमले किए। यह कोई साधारण अपराध नहीं है, बल्कि मानवता का पतन है। आरोपी अमित रैकवार केवल एक इंसान नहीं, बल्कि राक्षस है। और ऐसे राक्षस का जिंदा रहना समाज के लिए ख़तरनाक है। इतनी वीभत्स घटना के बाद भी उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की चुप्पी सबसे अधिक भयावह है। भाजपा सरकार बार-बार "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" का नारा देती है, पर जब किसी बेटी पर ऐसे निर्मम, अमानवीय हमले होते हैं, तब सरकार की संवेदनशीलता और कार्रवाई दोनों नदारद हो जाती हैं।  जो सरकार की ध्वस्त कानून व्यवस्था का उदाह...

बेटियों की लाशों पर खड़ी उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ?

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उत्तर प्रदेश में बेटियाँ मर रही हैं। कभी अस्मिता की रक्षा करते हुए , कभी भ्रष्ट व्यवस्था के हाथों , तो कभी उन्हीं संस्थानों से अपमानित होकर , जो उन्हें जीवन का रास्ता दिखाने के लिए बने थे। लेकिन सबसे दुखद बात यह है कि सरकार हिंदू-मुस्लिम कर रही है , प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है , और न्याय केवल किताबों में सिमटकर रह गया है।   रिया प्रजापति आत्महत्या: जब शिक्षा ही मौत की वजह बन जाए   मानधाता थाना के पितईपुर निवासी कमलेश प्रजापति की बेटी रिया प्रजापति (16) कमला शरण इंटर कॉलेज में नौ वी की छात्रा थी। कक्षा की फीस 800 रुपये नहीं भर पाई तो उसे परीक्षा से बाहर कर दिया। जिससे अपमानित और निराश होकर रिया घर वापस लौट गई। अपमान से आहत छात्रा ने फांसी लगा जान दे दी। 1/2 pic.twitter.com/6QGSx8zxB5 — Ram Prakash Prajapati (@RPPrajapatiHP) March 29, 2025 14 साल की मासूम रिया , जिसने कभी सपने देखे थे कि पढ़-लिखकर अपने परिवार का सहारा बनेगी , उसे 800 रुपये की फीस के कारण स्कूल से अपमानित करके निकाल दिया गया। परीक्षा देने से रोका गया , पूरे स्कूल के सामने जलील किया गया , और जब वह घर लौटी ...

पानी मांगे न मिले, बिन मांगे भरपूर, फसल पकी है अब खड़ी, चले नहर भरपूर!

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उत्तर प्रदेश में किसान पहले ही महंगाई, मौसम और सरकार की नीतियों से परेशान हैं, ऊपर से प्रशासन की लापरवाही उनकी मेहनत पर पानी फेर रही है। ताजा मामला भरुआ सुमेरपुर का है, जहां पत्योरा पंप कैनाल की पटरी कटने से तीन किसानों की 15 बीघा फसल बर्बाद हो गई। देवगांव के किसान धर्मेंद्र सिंह, जगदीश सिंह और मुलायम सिंह ने अपनी खून-पसीने की मेहनत से फसल तैयार की थी, लेकिन कैनाल के अचानक चालू होने और कमजोर मरम्मत के कारण पूरी फसल जलमग्न हो गई। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। किसान हर बार इस लापरवाही का शिकार होते हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार आँख मूंदकर बैठी रहती है। पानी मांगे न मिले, बिन मांगे भरपूर, फसल पकी है अब खड़ी, चले नहर भरपूर! सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसानों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब प्रशासन ने पानी नहीं छोड़ा, और अब जब फसल पक चुकी है, तब नहरों में लगातार पानी बहाया जा रहा है। यह सरकार की अव्यवस्थित नीतियों और सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही को दर्शाता है। पहले पानी की किल्लत से किसान परेशान रहे, उनकी फसल सूखने के कगार पर थी, और अब जब उनकी मेहनत रंग लाने वाली थी, तब खेतों में जरूरत से ...

बूँद-बूँद को तरसते हमीरपुर के लिए गंगा से लाया गया गंगा जल! किसान भी कर पाएंगे सिचाई?

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उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार की नीतियां दिखावे और धार्मिक भावनाओं के शोषण के अलावा और कुछ नहीं हैं। ये सरकार प्रयागराज से 25 हजार लीटर गंगाजल हमीरपुर के उन लोगों को बाँट रही है जो महाकुंभ में नहीं पहुच सके ताकि लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ किया जा सके। लेकिन यह दिखावे की राजनीति उन ग्रामीणों की असली तकलीफों को छुपा नहीं सकती , जो अपने ही घरों में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं।  सरकार 100-100 लीटर गंगाजल हर इलाके में टैंकरों से पहुंचा रही है , मगर वही सरकार हमीरपुर के लोगों को पीने का साफ पानी देने में नाकाम है।  यहां के कई गांवों और वार्डों में पानी की भीषण किल्लत है। घटिया पाइपलाइन और लीक होती जल आपूर्ति व्यवस्था के कारण लोगों को मजबूरन प्रदर्शन करना पड़ रहा है। अब जरा सोचिये जब सरकार के पास टैंकरों में गंगाजल भरकर बांटने की व्यवस्था है , तो फिर पीने का पानी क्यों नहीं पहुंचा पा रही ? क्या यह जनता की मूलभूत जरूरत नहीं है ? क्या बिना पानी के लोग जिन्दा रह सकते हैं? मैं यहाँ एक बात साफ कर देता हूँ कि यह पूरा घटनाक्रम भाजपा की "धार्मिक भावनाओं की राजनीति" का सबसे...

मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव बना धांधली का पर्याय : रामप्रकाश प्रजापति

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  मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव में जो कुछ हुआ, वह भारतीय लोकतंत्र पर एक काला धब्बा है। यह चुनाव नहीं बल्कि सत्ता की हनक, प्रशासनिक धांधली और लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या का शर्मनाक उदाहरण था। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे वीडियो इस धांधली के पुख्ता प्रमाण हैं, लेकिन सत्ता पक्ष और प्रशासन का रवैया इन वीडियो को नजरअंदाज करने का है, जो पूरी प्रक्रिया को संदेहास्पद बना देता है। मिल्कीपुर उपचुनाव में राय पट्टी अमानीगंज में फ़र्ज़ी वोट डालने की बात अपने मुँह से कहनेवाले ने साफ़ कर दिया है कि भाजपा सरकार में अधिकारी किस तरह से धांधली में लिप्त है। निर्वाचन आयोग को और कोई सबूत चाहिए क्या? @ECISVEEP @Uppolice pic.twitter.com/elS5sqtej9 — Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) February 5, 2025 समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय मतदाताओं द्वारा बार-बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद, प्रशासन ने आंखें मूंद लीं। पुलिस-प्रशासन ने सत्ता पक्ष के इशारे पर काम किया और विपक्षी समर्थकों को डराने-धमकाने से लेकर फर्जी मतदान कराने तक, हर प्रकार की अनैतिक रणनीति अपनाई गई। स्थानीय...

806 करोड़ से 2593 करोड़ तक, फिर भी किसानों को पानी नहीं

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  अर्जुन सहायक परियोजना की दुर्दशा और किसानों को उनका हक न मिलने का मामला भाजपा सरकार की नीतिगत विफलता और किसानों के प्रति उसकी अनदेखी को उजागर करता है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन आज भी हमीरपुर और अन्य क्षेत्रों के किसान मायूस हैं। 2015 में पूरी होने वाली इस परियोजना का बजट 806.5 करोड़ से बढ़कर 2593.39 करोड़ हो गया, लेकिन फिर भी काम अधूरा है। महोबा और झांसी के हिस्से में कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बांदा और हमीरपुर के किसानों को अब भी केवल वादों से बहलाया जा रहा है। 27 किमी की नहर अभी भी सूखी पड़ी है, जिससे साफ है कि सरकार का ध्यान किसानों की समस्याओं पर नहीं, बल्कि अपनी छवि चमकाने पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2021 में लोकार्पित की गई इस परियोजना का आज तक पूरा न होना भाजपा सरकार की लापरवाही और योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी असफलता का जीता-जागता उदाहरण है। समाजवादी पार्टी पूछती है कि जब किसानों को उनके हक का पानी ही नहीं मिल रहा, तो आखिर "डबल इंजन की सरकार" का वादा...