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806 करोड़ से 2593 करोड़ तक, फिर भी किसानों को पानी नहीं

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  अर्जुन सहायक परियोजना की दुर्दशा और किसानों को उनका हक न मिलने का मामला भाजपा सरकार की नीतिगत विफलता और किसानों के प्रति उसकी अनदेखी को उजागर करता है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन आज भी हमीरपुर और अन्य क्षेत्रों के किसान मायूस हैं। 2015 में पूरी होने वाली इस परियोजना का बजट 806.5 करोड़ से बढ़कर 2593.39 करोड़ हो गया, लेकिन फिर भी काम अधूरा है। महोबा और झांसी के हिस्से में कार्य पूरा हो चुका है, जबकि बांदा और हमीरपुर के किसानों को अब भी केवल वादों से बहलाया जा रहा है। 27 किमी की नहर अभी भी सूखी पड़ी है, जिससे साफ है कि सरकार का ध्यान किसानों की समस्याओं पर नहीं, बल्कि अपनी छवि चमकाने पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2021 में लोकार्पित की गई इस परियोजना का आज तक पूरा न होना भाजपा सरकार की लापरवाही और योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी असफलता का जीता-जागता उदाहरण है। समाजवादी पार्टी पूछती है कि जब किसानों को उनके हक का पानी ही नहीं मिल रहा, तो आखिर "डबल इंजन की सरकार" का वादा...